जलसा सालाना क़ादियान

हिंदुस्तान में अहमदिया मुस्लिम जमाअत का वार्षिक सम्मेलन

अहमदिया मुस्लिम जमाअत का सालाना जलसा (वार्षिक सम्मेलन) जिसका आरंभ हज़रत मसीह मौऊद अलैहिस्सलाम ने किया था। सामान्य रूप से यह सम्मेलन तीन दिन पर आधारित होता है जो शुक्रवार के दिन ख़ुत्बा जुमा से आरंभ होता है। जमाअत अहमदिया के संस्थापक हज़रत मिर्ज़ा ग़ुलाम अहमद साहब क़ादियानी इस जलसे के बारे में लिखते हैं:

“इस सम्मेलन के उद्देश्यों में से बड़ा उद्देश्य तो यह है कि ताकि प्रत्येक निष्ठावान को प्रत्यक्ष रूप से धार्मिक लाभ प्राप्त करने का अवसर प्राप्त हो और उनका ज्ञान बढ़े और ख़ुदा तआला की कृपा और सामर्थ्य से उनका आध्यात्म ज्ञान उन्नति करे। फिर इसके साथ यह भी लाभ हैं कि इस मुलाक़ात से समस्त भाइयों का परिचय बढ़ेगा और उनके जमाअत के साथ भाईचारे के संबंध भी दृढ़ होंगे।”

“और पुनः लिखा जाता है कि इस जलसा को साधारण इंसानी जलसों की तरह न समझें। यह वह मामला है जिसकी नींव पूर्णतया ख़ुदा तआला की सहायता और इस्लाम के पुनरुत्थान के लिए रखी गई है।”

(हज़रत मिर्ज़ा ग़ुलाम अहमद मसीह मौऊद अलैहिस्सलाम)

सर्व धर्म सम्मेलन

इस्लाम धार्मिक भाईचारे के महत्व पर इस सीमा तक बल देता है कि ऐसे उच्च स्तरों की प्राप्ति कहीं और असंभव है। दूसरे लोग यह मानते हैं कि जब तक दूसरे धर्मों को झूठा सिद्ध नहीं किया जाता तब तक वे धर्म अपनी सच्चाई को सिद्ध करने में असमर्थ हैं। इस्लाम का दृष्टिकोण बिलकुल भिन्न है क्योंकि यह सिखा जाता है कि इस्लाम निश्चित रूप से एक सच्चा धर्म है जो समस्त मानवता के लिए भेजा गया है इसी प्रकार ख़ुदा के समस्त नबी जो दुनिया के भिन्न-भिन्न लोगों और भिन्न-भिन्न क़ौमों की ओर भेजे गए थे वे भी ख़ुदा तआला की ओर से प्रेम और भाईचारे का संदेश ले कर आए थे। पवित्र क़ुरआन में इस का स्पष्ट रूप से वर्णन किया गया है। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि समस्त नबियों को उसी ने प्रेम और स्नेह की शिक्षाओं के साथ भेजा, अतः समस्त सच्चे मुसलमान उन को अवश्य स्वीकार करें।

इस्लाम के इस आधारभूत सिद्धांत के कारण हज़रत मिर्ज़ा ग़ुलाम अहमद मसीह मौऊद व महदी माहूद अलैहिस्सलाम   अपने प्रसिद्ध लेख में जिसे 27 दिसंबर 1896 ई० महान धार्मिक कांफ्रेंस “धर्म महोत्सव” लाहौर में पढ़ा गया था फ़रमाते हैं:

"आज इस शुभ सम्मेलन में जिसका उद्देश्य यह है कि प्रत्येक साहब जो बुलाए गए हैं वे प्रकाशित किए गए प्रश्नों का उत्तर लिखते हुए अपने-अपने धर्मों की विशेषताएं वर्णन करें। मैं इस्लाम की विशेषताएं वर्णन करूंगा। और इस से पहले कि मैं अपने उद्देश्य का आरंभ करूं इतना स्पष्ट कर देना उचित समझता हूँ कि मैंने इस बात का प्रबंध किया है कि जो कुछ वर्णन करूं वह ख़ुदा तआला की पवित्र वाणी पवित्र क़ुरआन से वर्णन करूं क्योंकि मेरे निकट यह बहुत आवश्यक है कि प्रत्येक व्यक्ति जो किसी ग्रन्थ का पाबन्द हो और उस ग्रन्थ को ख़ुदा की पुस्तक समझता हो वह प्रत्येक बात में उसी ग्रन्थ के सन्दर्भ से उत्तर दे और अपनी वकालत के अधिकारों को इतना न बढ़ाए कि मानो वह एक नई पुस्तक बना रहा है।"

अहमदिया मुस्लिम जमाअत के संस्थापक ने ज़ोरेस्टर, इब्राहीम, मूसा, ईसा, कृष्णा, बुद्ध, कन्फ्यूशस, लाऊज़ु और गुरु नानक सहित महान धार्मिक संस्थापकों और संतों की सुन्दर शिक्षाओं को स्वीकार किया और बताया कि किस प्रकार उन सब की वास्तविक शिक्षाओं को वास्तव में इस्लाम में एकत्र कर दिया है।

अहमदिया मुस्लिम जमाअत इन शिक्षाओं का अनुसरण करती है और इन्हीं के अनुसार जीवन व्यतीत करती है और समस्त धार्मिक संस्थापकों के प्रति सम्मान प्रकट करती है। समझाना-बुझाना, भाईचारा और सहिष्णुता की यही शिक्षाएं हैं जिन को हम बढ़ावा देते हैं और दुनिया के कोने-कोने तक फैलाते हैं।

अहमदिया मुस्लिम जमाअत का वार्षिक सम्मेलन भी वर्णन योग्य है जिस का आरंभ हज़रत मिर्ज़ा ग़ुलाम अहमद अलैहिस्सलाम मसीह मौऊद ने किया था, सामान्य रूप से यह सम्मेलन तीन दिन पर आधारित होता है जो जुमे वाले दिन जुमे के ख़ुत्बे से आरंभ होता है। जिसका उद्देश्य धर्मों के मध्य भाईचारे की स्थापना है और जो यह अवसर प्रदान करता है कि हम आकर प्यार और मुहब्बत का वातावरण उत्पन्न करें और जो बातें हम में परस्पर समान हैं उनको साझा करें। विशेष रूप से ख़ुदा तआला का अस्तित्व हमारे मध्य समान है। जैसा कि ख़ुदा तआला पवित्र क़ुरआन में फ़रमाता है:

قُلْ يَا أَهْلَ الْكِتَابِ تَعَالَوْا إِلَىٰ كَلِمَةٍ سَوَاءٍ بَيْنَنَا وَبَيْنَكُمْ أَلَّا نَعْبُدَ إِلَّا اللَّهَ وَلَا نُشْرِكَ بِهِ شَيْئًا

وَلَا يَتَّخِذَ بَعْضُنَا بَعْضًا أَرْبَابًا مِّن دُونِ اللَّهِ ۚ  فَإِن تَوَلَّوْا فَقُولُوا اشْهَدُوا بِأَنَّا مُسْلِمُونَ

तू कह दे हे अहले किताब! उस बात की ओर आ जाओ जो हमारे और तुम्हारे बीच सांझी है कि हम अल्लाह के अतिरिक्त किसी की उपासना नहीं करेंगे और न ही किसी चीज़ को उसका भागीदार ठहराएंगे और हम में से कोई किसी दूसरे को अल्लाह के अतिरिक्त रब नहीं बनाएगा। अतः यदि वे फिर जाएं तो तुम कह दो कि गवाह रहना कि निश्चित रूप से हम मुसलमान हैं। ( 3:65)

अतः सृष्टा की प्रसन्नता प्राप्त करने के लिए समस्त धार्मिक मतभेदों को समाप्त कर के और मानवता के मूल्यों को प्राथमिकता देते हुए एक हो कर रहें ताकि हम उस शैतान के विरुद्ध इकट्ठे हो सकें जो दुनिया की शांति भंग करना चाहता है।

जलसा सालाना के दूसरे दिन के प्रोग्राम में धर्मों के बीच एक वर्णन योग्य सेशन आयोजित होता है जो “धर्मिक मार्गदर्शकों का दिन” के रूप में होता है। सामान्य रूप से समस्त धर्मों में पारस्परिक सहिष्णुता के विषय को हमारा यह माटो प्रतिबिंबित करता है कि “प्रेम सबके लिए घृणा किसी से नहीं।” जो विभिन्न धार्मिक मार्गदर्शकों तथा अन्य सम्मानित जनों के द्वारा दिए गए भाषणों तथा उनके विचारों से प्रदर्शित होता है जो विश्वव्यापी सहानुभूति और समस्त धर्मों के मध्य पारस्परिक सहिष्णुता के समान दृष्टिकोण को प्रस्तुत करते हैं।

यह एक ऐसा अवसर भी है जब दूसरे धर्म और आस्था के लोग और हुकूमत के मेंबर भी आ कर अहमदिया मुस्लिम जमाअत के व्यवहारिक मूल्यों और कार्यों के बारे में अपने विचारों को व्यक्त करते हैं। यह इस बात को समझने का एक कीमती अवसर भी है कि यह जमाअत मुसलमानों के दूसरे संप्रदायों से किस प्रकार भिन्न है।

और अधिक यह कि इस सेशन को मेहमान सेशन के नाम से भी जाना जाता है जो प्रारंभिक दिनों की रिवायतों की ओर वापस ले जाता है जिसके अंतर्गत गैर अहमदी मेहमानों को अहमदियों के संदेश को समझने और जमाअत के कार्यों तथा आस्थाओं पर विचार विमर्श करने के लिए आमंत्रित किया जाता है।

उपस्थितगण और मेहमानों के लाभ हेतु “इस्लाम वैश्विक शांति” के विषय पर एक विशेष प्रदर्शनी जलसे के साथ-साथ चलती है। इस प्रदर्शनी में बड़े और रंगीन पोस्टरों का प्रयोग करते हुए इस्लाम की शांतिपूर्ण शिक्षाओं और वैश्विक शांति को स्थापित करने के लिए अहमदिया मुस्लिम जमाअत के वैश्विक इमाम हज़रत मिर्ज़ा मसरूर अहमद अय्यदहुल्लाहु तआला बिनस्रिहिल अज़ीज़ के विस्तृत रूप से किए गए कठिन प्रयासों को प्रस्तुत किया जाता है।

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