इस्लाम और देश प्रेम


स्वाधीनता दिवस के अवसर पर समस्त देशवासियों का हार्दिक अभिनंदन। आज से तकरीबन 74 साल पहले जिन स्वाधीनता संग्रामीओं ने हमारे देश को आज़ादी  दिलाई थी उनको हज़ारों सलाम।


शेख समीयुर रहमान

10 अगस्त 2021

प्रिय पाठकों! परमेश्वर ने मनुष्य के स्वभाव में यह बात रख दी है कि वह जिस स्थान पर पैदा होता है और जिन गलियों में वह अपना बचपन बिताता है वह उसके लिए ब्रह्मांड में सबसे सुंदर स्थान बन जाता है।और जब कभी किसी कारणवश उसे वह स्थान छोड़ना पड़ता है तो उसका मन दुख से भर जाता है और उसकी आँखें छलक जाती हैं।

इसी संदर्भ में पवित्र कुरान में हमें पैगंबर मोहम्मद साहब स अ व की एक प्रसिद्ध प्रार्थना का उल्लेख मिलता है । यह ईश्वर की बताई हुई प्रार्थना आपने उस समय और उन परिस्थिति में की, जब मक्का के क्रूर अधिपतियों के अत्याचार के कारण आपको मक्का (जो आपका जन्म स्थान) था छोड़ना पड़ा ।

पवित्र कुरान में वर्णित प्रार्थना यह है।

وَ قُلْ رَّبِّ اَدْخِلْنِیْ مُدْخَلَ صِدْ قٍ وَّاَخْرِجْنِیْ مُخْرَ جَ صِدْقٍ وَّاجْعَلْ لِّیْ مِنْ لَّدُنْکَ سُلْطَا نًا نَصِیْرًا

अर्थात:और तू कह, हे मेरे रब्ब ! मुझे इस प्रकार प्रविष्ट कर कि मेरा प्रवेश करना सत्य के साथ हो और मुझे इस प्रकार निकाल कि मेरा निकलना सत्य के साथ हो और अपनी ओर से मेरे लिए शक्तिशाली सहायक प्रदान कर [1]

पैगंबर मोहम्मद साहब फरमाते हैं ।

حُبُّ الْوَطَنِ مِنَ الْاِیْمَان

देश प्रेम आस्था और ईमान का हिस्सा है।[2]

अपनी मातृभूमि से प्यार करने का सर्वप्रथम और सबसे अच्छा तरीका यह है कि राष्ट्रीय निर्माण में एक दूसरे का सहायक बना जाए। एक दूसरे के साथ सहयोग किया जाए। राष्ट्र निर्माण विकास एवं उसकी मजबूती के कामों में सरकार,शासक और अधिकारियों के साथ मिलकर काम किया जाए और उनका सहयोग किया जाए।

इसी बात की तरफ ध्यान आकर्षित करते हुए पैगंबर मोहम्मद साहब फरमाते हैं।

عَلیکَ السمع َوالطا عۃَ فی عُسرِ کَ و یُسرِ کَ و مَنشَطِکَ ومَکرِ ھِک واثرۃِعلیک۔

तुम गरीब हो या अमीर,आनंदित हो या दुखी हो,अधिकारों से वंचित हो या और अधिमान्य व्यवहार हो, हर स्थिति में आपके लिए शासन काल के नियमों (कानूनी नियमों के अधीन) को सुनना और उनका पालन करना अनिवार्य है।[3]

इसलिए, उपरोक्त हदीस से पता चलता है कि जिस समय जिसका भी शासन हो उस समय राष्ट्र निर्माण,मानव कल्याण, धार्मिक आस्था, परंपराओं और संस्कृति संरक्षण इत्यादि समस्त प्रकार के कल्याणकारी कार्यक्रम में उस शासक की आज्ञा का पालन करना चाहिए।

विश्वव्यापी अहमदिया मुस्लिम संप्रदाय के पांचवें खलीफा हज़रत मिर्ज़ा मसरूर अहमद (अ ब) फरमाते हैं।

हज़रत मुहम्‍मद सल्लल्लाहो अलहिै वसल्लम ने यह शिक्षा दी है कि अपने देश से प्रेम ईमान का भाग है। अत: शुद्ध  देश-प्रेम इस्‍लाम की मांग है। ख़ुदा और इस्‍लाम से सच्‍चा प्रेम अपने  देश से प्रेम की मांग करता है। अत: यह बिल्‍कुल स्‍पष्‍ट है कि इस स्थिति में एक व्‍यक्ति के ख़ुदा से प्रेम तथा अपने देश से प्रेम के संबधं में उसके हितों का कोई टकराव नहीं हो सकता, जैसा कि अपने देश से प्रेम करने को ईमान का एक भाग बना दिया गया है। अत: यह बिल्‍कुल स्‍पष्‍ट है कि एक मुसलमान अपने संबधिं देश के लिए वफ़ादारी करने में सबसे उच्‍च स्‍तर पर पहुंचने का प्रयत्‍न करेगा, क्‍योंकि ख़ुदा तक पहुंचने और उसका सानिध्‍य प्राप्‍त करने का यह भी एक माध्‍यम है। अत: यह असंभव है कि ख़ुदा का वह प्रेम जो एक मुसलमान अपने अन्‍दर रखता है वह उसके लिए अपने देश से प्रेम और वफ़ादारी को प्रकट करने में एक रोक बन जाए।[4]

फिर आप फरमाते हैं:

आज एक अहमदी है जो जानता है कि देश प्रेम क्या होता है। और अहमदी जिस भी देश में रहते हैं, वह अपनी मातृभूमि, अपने देश के लिए शुद्ध प्रेम की एक व्यावहारिक तस्वीर है।[5]

अहमदिया मुस्लिम जमात भारत इसलाम के इस सच्ची और शुद्ध देश प्रेम की भावना को अपने अंदर रखते हुए हर वक्त देश सेवा में कार्यरत है। स्वच्छ भारत अभियान, रक्तदान शिविर, निशुल्क आई चेक अप कैंप, निशुल्क होम्योपैथिक एलोपैथिक कैंप, खेल और क्रीड़ा का आयोजन, विशेषतः गरीबों के लिए school अस्पताल का निर्माण इत्यादि देश के विकास एवं प्रगति के कार्य में लगी हुई है।

और इसी तरह जमात अहमदिया देश के हर संकट की घड़ी में देश के साथ खड़ी नज़र आएगी। चाहे भूकंप हो या कोई बाढ़ हो या महामारी हो या कोई और आपदा हो, देशवासियों की सहायता के लिए जमात अहमदिया सदा सर्वदा कार्यरत नजर आएगी।

अतः जमात अहमदिया का यह व्यवहारिक देश प्रेम का स्रोत वही सच्ची और शुद्ध इस्लामी शिक्षाएं हैं जो ऊपर वर्णन की गई है ।

विश्वव्यापी अहमदिया मुस्लिम जमाअत के सर्वोच्च प्रमुख हज़रत मिर्ज़ा मसरूर अहमद(अ ब) फरमाते हैं:

किसी भी देश के नागरिक के रूप में, हम अहमदी मुसलमान, हमेशा देश के प्रति पूर्ण प्रेम और निष्ठा दिखाएंगे। हर अहमदी मुसलमान की इच्छा होती है कि उसका चुना हुआ देश आगे बढ़े और उसे हमेशा इस उद्देश्य के लिए प्रयास करना चाहिए। जब भी किसी देश को अपने नागरिकों को बलिदान देने की आवश्यकता होगी, अहमदिया मुस्लिम जमात हमेशा राष्ट्र के लिए इस तरह के बलिदान को सहन करने के लिए तैयार रहेगा।[6]

सारे जहाँ से अच्छा, हिन्दोस्ताँ हमारा

हम बुलबुलें हैं इसकी, यह गुलिसताँ हमारा

जय हिंद!


लेखक जामिआ अहमदिया – अहमदिया धार्मिक संस्थान – से स्नातक हैं और महाराष्ट्र में प्रचारक के रूप में कार्यरत हैं।


सन्दर्भ

[1] पवित्र क़ुरआन सूरः बनि‌ इसराईल आयत 71

[2] मौज़ूआत अल-सुगानी हदीस: 81

[3] सहीह मुस्लिम किताब-अल-इमारह

[4] संबोधन सेना मुख्यालय कोब्लेन्ज़, जर्मनी, 2012, पुस्तक:विश्व संकट तथा शान्ति-पथ , पुरुष 3:4

[5] खुत्बा जुमा 14 अक्टूबर, 2005

[6] प्रेस रिलीज़ अहमदिय्या मुस्लिम जमाअत लंदन 11 अक्टूबर 2010

5 टिप्पणियाँ

Samiur Rahman · अगस्त 10, 2021 पर 10:03 पूर्वाह्न

प्रकाशन के लिए बहुत-बहुत शुक्रिया धन्यवाद
Jazakmllah

Sk ashim ahemmad · अगस्त 12, 2021 पर 3:36 अपराह्न

Sharing k liye bht bht shukriya

Ansar Ali Khan · अगस्त 14, 2021 पर 10:58 पूर्वाह्न

Mashallah…. Allah tala iske behtareen nataaij zaahir kare….

    Asif ahmad malkana · अगस्त 26, 2021 पर 12:41 अपराह्न

    Masha Allah Bahut Behtreen Article he
    Allah kare ye Desh ke sabhi logon tak pahunche aur Behtreen nataaij zaahir hon

Ansar Ali Khan · अगस्त 14, 2021 पर 10:59 पूर्वाह्न

Mashallah…. Bahot achha Article hai..
Iske behtareen nataij zaahir ho..
Aameen .

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