अनसार अली ख़ान

APRIL 06, 2021

किसी भी राष्ट्र तथा जाति की उन्नति उसके युवाओं की उन्नति तथा उनकी प्रतीभा पर निर्भर करती है । युवा लोग हमारे राष्ट्र तथा जाति की प्रगति और विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, इन्ही युवाओं के प्रयासों से हमारे राष्ट्र के तेजी से विकास और विकास में मदद मिल सकती है। एक महत्वपूर्ण सर्वे के मुताबिक युवा कुल राष्ट्रीय आबादी का बड़ा हिस्सा हैं। दुनिया की लगभग २५ प्रतिशत आबादी युवा है । जनसंख्या का इतना बड़ा हिस्सा राष्ट्र को विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और इसे नज़रअंदाज नहीं किया जा सकता है। जिस संकल्प और ऊर्जा के साथ युवा काम कर सकते हैं वह उन्हें राष्ट्र का सबसे मूल्यवान और सक्षम नागरिक बनाता है। युवा वह समय है जब नवोन्मेषी और रचनात्मक विचार मन में आते हैं । राष्ट्र की नीतियों, योजनाओं और विकास कार्यों को युवाओं द्वारा सर्वोत्तम रूप से लागू किया जा सकता है। वे अधिक उत्साही और ऊर्जावान हैं और अगर उनकी क्षमता का सही दिशा में उपयोग किया जाता है तो वे तेजी से प्रगति सुनिश्चित कर सकते हैं।
इस संक्षिप्त परिचय के पश्चात यह बताना ज़रूरी है कि अहमदिया मुस्लिम युवा संगठन (मजलिस ख़ुद्दामुल अहमदिया) जिस की बुनियाद ३१ जनवरी १९३८ को रखी गई थी के संस्थापक हज़रत मिर्ज़ा बशीरुद्दीन महमूद अहमद साहिब ने कहा था कि – क़ौमों का सुधार युवाओं के सुधार के बिना नहीं हो सकता । कोई जाति तब तक उन्नति नहीं कर सकती जब तक उस जाति तथा राष्ट्र के नौजवान अर्थात युवा पीढ़ी नेकी में अर्थात पुण्य कर्म में आगे ना बढ़ें। क्योंकि पथभ्रष्ट इन्सान किसी भी क्षेत्र में उन्नति नहीं कर सकता। हर इंसान का एक लक्ष होना चाहिए अगर वह लक्ष पुण्य हो तो आगे सारा कर्म उसके अधिन हो जाता है।
अल्लाह ताला पवित्र क़ुरआन में इन्ही लक्षों का वर्णन करता है, फ़रमाया :- और हर एक के लिए एक लक्ष्य है जिसकी ओर वह ध्यान देता है अतः पुण्य कर्म में एक दूसरे से आगे बढ़ जाओ। तुम जहां कहीं भी होगे अल्लाह तुम्हें इकट्ठा करके ले आएगा , निस्संदेह अल्लाह प्रत्येक वस्तु पर जिसे वह चाहे स्थाई सामर्थ्य रखता है । (सूरह् अल बक़रा १४९)
इसकी वयाख्या करते हुए अहमदिया मुस्लिम युवा मंच के प्रतिष्ठाता हज़रत मिर्ज़ा बशीरुद्दीन महमूद अहमद साहिब ने अपनी पुस्तक तफ़्सीर कबीर , भाग २ पृष्ठ २५२-२५३ में लिखते हैं कि अल्लाह ताला फ़रमाता है कि हर मनुष्य का कोई ना कोई लक्ष्य होता है जो हर समय उसकी आंखों के सामने होता है और अपने लक्ष्य को प्राप्त करने हेतु वह अपनी सारी चेष्टाएं लगा देता है कभी उसका लक्ष्य व्यापार में उन्नति करने का होता है, कभी खेती-बाड़ी में उन्नति उसका लक्ष्य होता है, कभी राजनीति में उन्नति करना उसका लक्ष्य होता है, कभी ज्ञान-विज्ञान में उन्नति उसका लक्ष्य होता है, कभी विधवाओं अनाथों और गरीबों की सेवा करना उसका लक्ष्य होता है, कभी धर्म प्रचार को अपना लक्ष्य बनाता है। तात्पर्य यह है कि हर मनुष्य का कोई ना कोई लक्ष्य होता है और उसको प्राप्त करने के लिए वह हर तरह की चेष्टाएं हर तरह की त्याग से काम लेता है । निठल्ले से निठल्ले मनुष्य को भी देख लो तो ज्ञात होता है कि वह हर समय कुछ ना कुछ करता रहता है , क्योंकि मानवीय प्रकृति मैं खाली बैठना शामिल ही नहीं है, यही दशा जातियों की है। हर जाति ने अपना अपना लक्ष्य बना लिया है और वह उसके लिए सब कुछ त्याग देती है । अतः अब हर मनुष्य संसार में कुछ न कुछ अवश्य करता रहता है और किसी न किसी काम में व्यस्त रहना चाहता है । तो तुम्हारा भी एक लक्ष्य होना चाहिए । ऐसा ना हो कि जाति की अधिकता के कारण कोई किसी लक्ष्य को अपने सामने रख ले और कोई किसी लक्ष्य को,”मुवल्लीहा” में कर्ता को छुपा लिया गया है । और इबारत इस तरह है कि “वलिकुल्ले विजहातुन् हुवा मुवल्लीहा वजहाहु” अर्थात हर मनुष्य की कोई ना कोई दिशा होती है अथवा हर मनुष्य का कोई ना कोई लक्ष्य होता है । जिस पर वह अपने संपूर्ण ध्यान को केंद्रित करता है और जिसे जीवन भर अपने सामने रखता है । और पूरी लग्न और ध्यान से उसे प्राप्त करने की चेष्टा करता है। परंतु लोग तो अपने लक्ष्य अपने आप चुन लेते हैं लेकिन हम अर्थात अल्लाह ताला स्वयं कहता है कि हम मुहम्मद (स्व.अ.व.स) के अनुयायियों पर कृपा करते हुए ख़ुद ही एक सर्वश्रेष्ठ लक्ष्य उनके सामने रखते हैं, और आदेश देते हैं कि “फ़स्तबिकुल् ख़ैरात” अर्थात “पुण्य प्राप्त करने की दौड़ में एक-दूसरे से आगे बढ़ने की चेष्टा करो ” इस आयत में पुण्य की दौड़ में एक दूसरों से आगे बढ़ने की कोशिश करने के संदर्भ में बताकर अल्लाह ताला ने क़ौम की उन्नति का एक आश्चर्यजनक रहस्य बताया है ।
इन शिक्षाओं के चलते अहमदिया मुस्लिम युवा जाति तथा क़ौम की उन्नति के लिए हर संभव प्रयत्न करती है। अनाथों,विधवाओं,असहायों की सहायता, साक्षरता अभियान, दीन-दुखियों की सेवा के लिए वचनबद्ध है। नि‍:शुल्क मेडिकल सेवाएं, यतीमों तथा विधवाओं को भत्ता, प्राकृतिक विपदा जैसे बाढ़, भूकंप, अकाल सूखाग्रस्त इलाकों में अन्तर्राष्ट्रीय अहमदिया मुस्लिम युवा संगठन का राहत संस्था “Humanity First” दिन-रात सेवाएं दे रही है। ज्ञात हो कि “स्वच्छ भारत अभियान” के अंतर्गत अहमदी युवा अपने तथा अपने परिवेश की साफ़ सफाई के लिए “वक़ारे अमल” के तहत देश के विभिन्न हिस्सों में कार्यरत हैं ।
इसके अतिरिक्त जब कभी समाज को अहमदी युवाओं की किसी भी क्षेत्र में आवश्यकता पड़ी तो उसे अपना परम सौभाग्य समझते हुए देश तथा समाज सेवा के लिए अपना तन-मन झोंकने के लिए तत्पर रहते हैं। अभी हमारा प्यारा मुल्क बल्कि पूरी दुनिया कोरोना वायरस के संकट से जूझ रही है इस अवसर पर भी किसी भी कठिनाइयों की परवाह किए बिना अहमदिया मुस्लिम युवाओं ने मानव सेवा को अपना परमधर्म तथा पुण्य समझते हुए लाखों लोगों तक मेडिकल सेवाएं तथा हज़ारों परिवारों को राहत सामग्रियां पहुंचाई। इन्ही पुण्य कर्मों के कारण अहमदी युवा विश्व भर में परिचित तथा प्रशंसित है।
संस्थापक अहमदिया मुस्लिम युवा संगठन ने युवाओं को संबोधन करते हुए क्या ही सुन्दर फ़रमाया –
अमन के साथ रहो फ़ितनों में हिस्सा मत लो,
बाइसे फ़िक्र व परेशानी ए हुक्काम् न हो।
अपनी इस उम्र को एक नेमत ए उज़्मा समझो,
बाद में ताकि तुम्हें शिकवा ए अय्याम् न हो।


लेखक अहमदिया मुस्लिम जमात सोलापुर के मिशनरी हैं |



1 टिप्पणी

Sadam khan · अप्रैल 6, 2021 पर 10:53 पूर्वाह्न

#ahmadiyyattherealislam

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