नेमतुल्लाह नवाज़, उप-निदेशक, राष्ट्रीय जनसंपर्क विभाग
अहमदिया मुस्लिम जमाअत ने 28 मार्च को बेरिंग कॉलेज, बटाला में क्रिश्चियन इंस्टीट्यूट फॉर रिलिजियस स्टडीज़ द्वारा “जलवायु न्याय” विषय पर आयोजित एक सर्वधर्म सेमिनार में भाग लिया। इस सेमिनार में विभिन्न धार्मिक परंपराओं के विद्वान, विशेषज्ञ और धर्मगुरु जलवायु न्याय के ज्वलंत मुद्दे पर विचार-विमर्श करने तथा नैतिक व आध्यात्मिक मूल्यों पर आधारित साझा समाधान तलाशने के लिए एक मंच पर एकत्र हुए।
कार्यक्रम में ईसाई, सिख और हिंदू समुदाय के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। अमृतसर डायोसीज़ के बिशप मनोज चरन जी ने सृष्टि के प्रति नैतिक ज़िम्मेदारी को रेखांकित करते हुए ईसाई दृष्टिकोण से सभा को संबोधित किया, जबकि एडवोकेट पवन सुखबीर सिंह जी ने पर्यावरण संरक्षण पर सिख शिक्षाओं से जुड़े विचार साझा किए। श्री नीरज शर्मा ने प्रकृति के साथ सामंजस्य पर बल देते हुए हिंदू धर्म के दृष्टिकोण से इस विषय पर अपनी बात रखी।
इस्लामी दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हुए अहमदिया मुस्लिम जमाअत के अपर राष्ट्रीय जनसंपर्क निदेशक श्री के. तारिक़ अहमद ने पवित्र क़ुरआन, हज़रत मुहम्मद (स.) के कथनों और अहमदिया मुस्लिम जमाअत के संस्थापक हज़रत मिर्ज़ा ग़ुलाम अहमद (अ.) की शिक्षाओं के आलोक में जलवायु न्याय की अवधारणा पर प्रकाश डाला। उन्होंने जमाअत के वर्तमान सर्वोच्च प्रमुख हज़रत मिर्ज़ा मसरूर अहमद (अय्यदहुल्लाह) के निर्देशों की ओर भी ध्यान आकर्षित किया, जिसमें उन्होंने बिगड़ते अंतरराष्ट्रीय हालात, परमाणु युद्ध के बढ़ते ख़तरे और पर्यावरण पर इसके पड़ने वाले विनाशकारी प्रभाव के बारे में दुनिया को आगाह किया है।
भाषणों के बाद श्रोताओं को सवाल पूछने का अवसर दिया गया, जिससे प्रतिभागियों के बीच एक रोचक और उपयोगी चर्चा हुई। यह कार्यक्रम सर्वधर्म संवाद के लिए एक सार्थक मंच साबित हुआ, जिससे पर्यावरण और जलवायु न्याय को लेकर इस्लाम के दृष्टिकोण को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिली।
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