पवित्र रमज़ान: आत्मशुद्धि, संयम और ईश-निकटता का महीना

रमज़ान के बाद भी हमारी नमाज़ में सुधार बना रहे, हमारे चरित्र में नर्मी आए, हमारी वाणी में मिठास हो, हमारे व्यवहार में करुणा हो तो समझिए रमज़ान सफल हुआ।