
हज़रत आयशा के साथ पैगंबर मुहम्मद के विवाह के बारे में अपमानजनक टिप्पणी निंदनीय है
इतिहास के अनुसार, हज़रत आयशा (र ज़) अपने निकाह के समय नौ वर्ष की थीं और विवाह के समय बारह से चौदह वर्ष की थीं।
लेख

इतिहास के अनुसार, हज़रत आयशा (र ज़) अपने निकाह के समय नौ वर्ष की थीं और विवाह के समय बारह से चौदह वर्ष की थीं।

प्रत्येक अहमदी पुरुष और महिला की यह ज़िम्मेदारी है कि वे अपने घरों से आरंभ कर शांति और सद्भाव की आधारशिला रखने का प्रयास करें।

रोमाना सैगल, जनरल सेक्रेटरी, लज्ना इमाईल्लाह, बेंगलुरु अहमदिया मुस्लिम जमाअत के महिला संगठन लज्ना इमाईल्लाह की बेंगलुरु इकाई द्वारा 23 अगस्त 2026 को कैनोपी बैंक्वेट हॉल में “पूर्ण न्याय से शांति” (Peace through Absolute Justice) विषय पर एक भव्य सर्वधर्म शांति सम्मेलन का आयोजन किया गया। जमाअत के मूल सिद्धांत

आज भी जब आधुनिक दुनिया स्त्री शिक्षा के अधिकार पर बहस कर रही है, इस्लाम ने चौदह सौ साल पहले ज्ञान प्राप्ति को महिलाओं का केवल अधिकार ही नहीं, बल्कि उनका सामाजिक कर्तव्य बनाकर नारी अधिकारों में एक युगांतरकारी परिवर्तन की नींव रखी थी।

मुज़फ़्फ़र अहमद, अध्यक्ष, अहमदिया मुस्लिम जमाअत, तिरुवनंतपुरम तिरुवनंतपुरम के गवर्नमेंट कॉलेज फॉर विमेन में 25 जून 2026 को “विज्ञान, धर्म और साहित्य के बीच संबंध” (The Relationship Between Science, Religion, and Literature) विषय पर एक सेमिनार का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम ‘अंडर द ग्रीनवुड ट्री इंग्लिश क्लब’ के तत्वावधान

डॉ. मंसूरा अल्लादीन, राष्ट्रीय अध्यक्षा, लज्ना इमाईल्लाह, भारत लज्ना इमाईल्लाह (अहमदिया महिला संगठन) भारत द्वारा 4 अप्रैल 2026 को क़ादियान स्थित जमाअत के राष्ट्रीय मुख्यालय के लज्ना हॉल में “मेरे धर्म में महिलाओं का स्थान” विषय पर एक सर्वधर्म सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में समाज के विभिन्न

नेमतुल्लाह नवाज़, उप-निदेशक, राष्ट्रीय जनसंपर्क विभाग अहमदिया मुस्लिम जमाअत ने 28 मार्च को बेरिंग कॉलेज, बटाला में क्रिश्चियन इंस्टीट्यूट फॉर रिलिजियस स्टडीज़ द्वारा “जलवायु न्याय” विषय पर आयोजित एक सर्वधर्म सेमिनार में भाग लिया। इस सेमिनार में विभिन्न धार्मिक परंपराओं के विद्वान, विशेषज्ञ और धर्मगुरु जलवायु न्याय के ज्वलंत मुद्दे

शरजील अहमद, अध्यक्ष, मजलिस ख़ुद्दामुल अहमदिया, क़ादियान अहमदिया मुस्लिम जमाअत के युवा संगठन ‘मजलिस ख़ुद्दामुल अहमदिया’ ने 3 मार्च 2026 को मानव सेवा और जमाअत के मूल सिद्धांत “मोहब्बत सब के लिए, नफ़रत किसी से नहीं” के तहत एक विशेष सेवा अभियान का आयोजन किया। यह सेवा शिविर डेरा बाबा

रमज़ान के बाद भी हमारी नमाज़ में सुधार बना रहे, हमारे चरित्र में नर्मी आए, हमारी वाणी में मिठास हो, हमारे व्यवहार में करुणा हो तो समझिए रमज़ान सफल हुआ।

अहमदिया मुस्लिम समुदाय का संदेश यही है कि असली अमन तभी संभव है जब इंसानियत न्याय, सेवा और आध्यात्मिकता के रास्ते पर चले। इस अंतर्राष्ट्रीय शांति दिवस में हम सब मिलकर वह दुनिया बनाएं जहाँ हर इंसान को यह भरोसा हो कि उसका कल सुरक्षित है।

मुसलमानों पर निरन्तर आक्रमण और अत्याचार होने के बावजूद इस्लाम ने जंगो में जो आदेश दिए वर्तमान काल में सभ्य से सभ्य समुदाय भी उसका उदाहरण प्रस्तुत करने में असफ़ल है।

प्रत्येक अहमदी पुरुष और महिला की यह ज़िम्मेदारी है कि वे अपने घरों से आरंभ कर शांति और सद्भाव की आधारशिला रखने का प्रयास करें।

रोमाना सैगल, जनरल सेक्रेटरी, लज्ना इमाईल्लाह, बेंगलुरु अहमदिया मुस्लिम जमाअत के महिला संगठन लज्ना इमाईल्लाह की बेंगलुरु इकाई द्वारा 23 अगस्त 2026 को कैनोपी बैंक्वेट हॉल में “पूर्ण न्याय से शांति” (Peace through Absolute Justice) विषय पर एक भव्य सर्वधर्म शांति सम्मेलन का आयोजन किया गया। जमाअत के मूल सिद्धांत

आज भी जब आधुनिक दुनिया स्त्री शिक्षा के अधिकार पर बहस कर रही है, इस्लाम ने चौदह सौ साल पहले ज्ञान प्राप्ति को महिलाओं का केवल अधिकार ही नहीं, बल्कि उनका सामाजिक कर्तव्य बनाकर नारी अधिकारों में एक युगांतरकारी परिवर्तन की नींव रखी थी।

मुज़फ़्फ़र अहमद, अध्यक्ष, अहमदिया मुस्लिम जमाअत, तिरुवनंतपुरम तिरुवनंतपुरम के गवर्नमेंट कॉलेज फॉर विमेन में 25 जून 2026 को “विज्ञान, धर्म और साहित्य के बीच संबंध” (The Relationship Between Science, Religion, and Literature) विषय पर एक सेमिनार का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम ‘अंडर द ग्रीनवुड ट्री इंग्लिश क्लब’ के तत्वावधान

डॉ. मंसूरा अल्लादीन, राष्ट्रीय अध्यक्षा, लज्ना इमाईल्लाह, भारत लज्ना इमाईल्लाह (अहमदिया महिला संगठन) भारत द्वारा 4 अप्रैल 2026 को क़ादियान स्थित जमाअत के राष्ट्रीय मुख्यालय के लज्ना हॉल में “मेरे धर्म में महिलाओं का स्थान” विषय पर एक सर्वधर्म सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में समाज के विभिन्न

नेमतुल्लाह नवाज़, उप-निदेशक, राष्ट्रीय जनसंपर्क विभाग अहमदिया मुस्लिम जमाअत ने 28 मार्च को बेरिंग कॉलेज, बटाला में क्रिश्चियन इंस्टीट्यूट फॉर रिलिजियस स्टडीज़ द्वारा “जलवायु न्याय” विषय पर आयोजित एक सर्वधर्म सेमिनार में भाग लिया। इस सेमिनार में विभिन्न धार्मिक परंपराओं के विद्वान, विशेषज्ञ और धर्मगुरु जलवायु न्याय के ज्वलंत मुद्दे

शरजील अहमद, अध्यक्ष, मजलिस ख़ुद्दामुल अहमदिया, क़ादियान अहमदिया मुस्लिम जमाअत के युवा संगठन ‘मजलिस ख़ुद्दामुल अहमदिया’ ने 3 मार्च 2026 को मानव सेवा और जमाअत के मूल सिद्धांत “मोहब्बत सब के लिए, नफ़रत किसी से नहीं” के तहत एक विशेष सेवा अभियान का आयोजन किया। यह सेवा शिविर डेरा बाबा

रमज़ान के बाद भी हमारी नमाज़ में सुधार बना रहे, हमारे चरित्र में नर्मी आए, हमारी वाणी में मिठास हो, हमारे व्यवहार में करुणा हो तो समझिए रमज़ान सफल हुआ।

अहमदिया मुस्लिम समुदाय का संदेश यही है कि असली अमन तभी संभव है जब इंसानियत न्याय, सेवा और आध्यात्मिकता के रास्ते पर चले। इस अंतर्राष्ट्रीय शांति दिवस में हम सब मिलकर वह दुनिया बनाएं जहाँ हर इंसान को यह भरोसा हो कि उसका कल सुरक्षित है।

मुसलमानों पर निरन्तर आक्रमण और अत्याचार होने के बावजूद इस्लाम ने जंगो में जो आदेश दिए वर्तमान काल में सभ्य से सभ्य समुदाय भी उसका उदाहरण प्रस्तुत करने में असफ़ल है।